भाग 1: चिंता और पैसे का दिमागी संबंध मन का डर और खाली जेब कल्पनाकीजिए,रातकेग्यारहबजचुकेहैं।घरमेंसबसोरहेहैं,लेकिनएकइंसानअभीभीजागरहाहै।उसकेसामनेबिजलीका bill रखाहै, mobile में bank balance खुलाहै,औरदिमागमेंबसएकहीसवालघूमरहाहै,अगलेमहीनेघरकैसेचलेगा? डरयहींसेशुरूहोताहै।क्योंकि कईबारगरीबीसिर्फजेबमेंनहींहोती,वहदिमागमेंभीघरबनालेतीहै।आदमीमेहनतकरताहै,कमाताहै,फिरभीहरमहीनेऐसालगताहैजैसेपैसाहाथमेंआतेहीकहींगायबहोगया। औरजिज्ञासा यहहैकिक्यासचमेंज्यादापैसाकमानेकेलिएपहलेज्यादाभागनाजरूरीहै,यापहलेचिंताकोकमकरनाजरूरीहै?क्याहमारीटेंशनहीहमारीकमाईकेरास्तेमेंसबसेबड़ीदीवारबनसकतीहै? Richard Carlson कीकिताब Don’t Worry, Make Money इसीसवालसेशुरूहोतीहै।यहकिताबसिर्फपैसाकमानेकी tricks नहींबताती,बल्कियहसमझातीहैकिपैसाबनानेसेपहलेइंसानकोअपनेमनकाडरसमझनापड़ताहै। Richard Carlson एक psychotherapist और motivational speaker थे।उन्होंने stress और worry को बहुतकरीबसेदेखाथा।उनकेपासऐसेलोगआतेथे,जिनकेपासनौकरीथी, family थी, skills थीं,लेकिनअंदरसेवेहरसमयटूटेहुएरहतेथे। उनकीसबसेमशहूरकिताब Don’t … Read more